Rajo-dhūli-saṃmūḍha-saṅgrāmaḥ
The Dust-Obscured Battle and Mutual Charges
संक्रुद्ध: कृष्णसहित: पार्थ: किमकरोद् युधि । संजय! मेरा तो विश्वास है कि दुर्योधनपर घोर संकट प्राप्त होनेवाला है। श्वेतके मारे जाने और भीष्मकी विजय होनेसे अत्यन्त क्रोधमें भरे हुए श्रीकृष्णसहित अर्जुनने युद्धसस््थलमें क्या किया? ।। १३ है || अर्जुनाद्धि भयं भूयस्तन्मे तात न शाम्यति,तात! अर्जुनसे मुझे अधिक भय बना रहता है और वह भय कभी शान्त नहीं होता; क्योंकि कुन्ती-नन्दन अर्जुन शूरवीर तथा शीघ्रतापूर्वक अस्त्र संचालन करनेवाला है। मैं समझता हूँ कि वह अपने बाणोंद्वारा शत्रुओंके शरीरोंको मथ डालेगा
dhṛtarāṣṭra uvāca | arjunād dhi bhayaṃ bhūyas tan me tāta na śāmyati | tāta! arjunaḥ śūro vegavān āśu śastrapravartakaḥ | manye śarair ariśarīrāṇi mathayiṣyati ||
持国王说道:“孩子啊,我对阿周那的恐惧只会愈发增长,丝毫不曾平息。因为阿周那——昆蒂之子——乃真正的勇士,操持兵器迅疾如风。我相信他将以箭矢搅碎并撕裂敌人的躯体。”
धृतराष्ट उवाच