धृतराष्ट्र रवाच स्पृश मां पाणिना भूय: परिष्वज च पाण्डव | जीवामीवातिसंस्पर्शात् तव राजीवलोचन,धृतराष्ट्र बोले--कमलनयन पाण्डुनन्दन! तुम फिरसे मेरे शरीरपर अपना हाथ फेरो और मुझे छातीसे लगा लो। तुम्हारे सुखदायक स्पर्शसे मानो मेरे शरीरमें प्राण आ जाते हैं
持国王说道:“噢,般度之子,莲华眼者!请再以手抚触我的身躯,并将我拥入胸前。因你这安慰的触碰,仿佛我的身中又有生命回转。”
वैशम्पायन उवाच