Vipula’s Guru-Obedience, Divine Flowers, and the Peril of Others’ Oaths (विपुलोपाख्यानम्—पुष्पप्राप्तिः शपथ-प्रसङ्गश्च)
स्त्रीबुद्ध्या न विशिष्येत तास्तु रक्ष्या: कथं नरै: । जिस नीतिशास्त्रको शुक्राचार्य जानते हैं, जिसे बृहस्पति जानते हैं, वह भी स्त्रीकी बुद्धिसे बढ़कर नहीं है। ऐसी स्त्रियोंकी रक्षा पुरुष कैसे कर सकते हैं ।।
女子之智并不逊于任何事物;然而她们却被说成应当受护——男子又如何能护得住她们?即便是舒克罗阿阇梨所知、布里哈斯帕提所知的治世之学,也不胜过女子之智。如此之女,男子又怎能守护?又有人说:不实亦可称为真实,而真实亦复可被称为不实。
युधिछिर उवाच