पात्रलक्षण-परिक्षा (Pātra-Lakṣaṇa Parīkṣā) — Criteria for a Worthy Recipient
वासयेत गृहे राजन् न तस्मात् परमस्ति वै । राजन! विशुद्ध जातिसे युक्त तथा तीक्ष्ण व्रतका पालन करनेवाले धर्मज्ञ ब्राह्मणको अपने घरमें ठहराना चाहिये। इससे बढ़कर दूसरा कोई पुण्यकर्म नहीं है
vāsayet gṛhe rājan na tasmāt param asti vai |
毗湿摩说道:“噢,国王,当在自家之中施与住宿;诚然,再无高于此的功德。”在伦理语境中,此偈推崇“侍奉宾客”(atithi-sevā)——以礼敬与资助承当其德之来客(尤指博学而持戒的婆罗门)为至上的法行与社会责任。
भीष्म उवाच