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Shloka 106

तीर्थवंशोपदेशः

Tīrtha-vaṃśa Upadeśa: Instruction on the Fruits of Sacred Waters

ये भागा रक्षसां प्राप्तास्त उक्ता भरतर्षभ | घीकी आहुति दिये बिना ही जो कुछ परोसा जाता है तथा जिसमेंसे पहले कुछ दुराचारी मनुष्योंको भोजन करा दिया गया हो

婆罗多族之雄啊!凡未先以酥油(ghī)作供献而径自端上的食物,或先让行恶之人先食其一部分的食物,皆被视为罗刹之分。婆罗多中的至上者啊,此处已说尽罗刹所得之食分。

भीष्म उवाच