उपदेशदोषप्रसङ्गः (Upadeśa-doṣa-prasaṅgaḥ) — The Risk of Misapplied Counsel
उत्स्मयन्तं च सततं दृष्टवासौ मन्युमाविशत् | राजन! इस प्रकार अनेक बार राजाने पुरोहितका उपहास किया। पुरोहितने जब अनेक बार और निरन्तर उस राजाको अपने प्रति हँसते और मुसकराते लक्ष्य किया, तब उनके मनमें बड़ा खेद और क्षोभ हुआ ।।
那祭司见国王总是带着讥笑,心中便涌起愤懑与悲痛。随后,在一处僻静之地,普罗希塔与国王相会。
भीष्म उवाच