Ādi Parva, Adhyāya 90 — Pūror Vaṃśa, Kuru-Pravara, and the Janamejaya Line
Genealogical Recitation
अहं हि पूर्वो वयसा भवदभ्य- स्तेनाभिवादं भवतां न प्रयुञ्जे । यो विद्यया तपसा जन्मना वा वृद्ध: स पूज्यो भवति द्विजानाम्,मैं आपलोगोंसे अवस्थामें बड़ा हूँ, अतः आपलोगोंको प्रणाम नहीं कर रहा हूँ। द्विजातियोंमें जो विद्या, तप और अवस्थामें बड़ा होता है, वह पूजनीय माना जाता है
我在年岁上本就先于诸位,因此不向诸位致礼。在两生族(dvija)之中,凡以学识、苦行与年长而胜出者,方为应受敬奉之人。
अट्क उवाच