शृङ्गिशापः—तक्षककाश्यपसंवादः (Śṛṅgī’s Curse and the Takṣaka–Kāśyapa Dialogue)
यस्य कन्यास्ति भूतस्य ये मयेह प्रकीर्तिता: । ते मे कन्यां प्रयच्छन्तु चरत: सर्वतोदिशम्,“मैंने यहाँ जिनका नाम लेकर पुकारा है, उनमेंसे जिस किसी भी प्राणीके पास विवाहके योग्य विख्यात गुणोंवाली कन्या हो, वह सब दिशाओंमें विचरनेवाले मुझ ब्राह्मणगको अपनी कन्या दे
塔克沙迦说道:“在我于此点名所呼之众生中,凡有适婚之女、以德行闻名者,当将其女许与我——我这遍行四方之婆罗门。”
तक्षक उवाच