परिक्षिद्वृत्तान्तप्रश्नः
Inquiry into Parīkṣit’s Conduct and the Beginnings of His Downfall
चरन् दीक्षां महातेजा दुश्चरामकृतात्मभि: । तीर्थेष्वाप्लवनं कृत्वा पुण्येषु विचचार ह,उन महातेजस्वी महर्षिने ऐसे कठोर नियमोंकी दीक्षा ले रखी थी, जिनका पालन करना दूसरे अजितेन्द्रिय पुरुषोंके लिये सर्वथा कठिन था। वे पवित्र तीर्थोमें स्नान करते हुए विचर रहे थे
彼大威光之大圣,受持严峻戒行,非制御诸根者难以奉行。于是他巡行四方,于诸清净圣地(tīrtha)沐浴净身而行。
तक्षक उवाच