Jaratkāru’s Marital Compact and Departure (जरत्कारु–जरत्कारुणी संवादः)
तापसैरुपनीतानि फलानि सहिता मया । ततो राजा ससचिव: फलान्यादातुमैच्छत,तदनन्तर उन्हें पारितोषिक देने आदिका कार्य करके कहा--“'अब आपलोग जाय॑।' तपस्वियोंके वेषमें छिपे हुए उन नागोंके चले जानेपर राजाने अपने मन्त्रियों और सुहृदोंसे कहा--'ये सब तपस्वियोंद्वारा लाये हुए बड़े स्वादिष्ठ फल हैं। इन्हें मेरे साथ आपलोग भी खायेँ।” ऐसा कहकर मन्सत्रियोंसहित राजाने उन फलोंको लेनेकी इच्छा की
tāpasair upanītāni phalāni sahitā mayā | tato rājā sa-sacivaḥ phalāny ādātum aicchat |
达克沙迦说道:“那些仙人携果而来,亦有我随行。于是国王与诸臣便欲收受那些果实。”在叙事之中,此偈强调:外在的圣洁征象可被用来博取信任;而君主若不加防备地接受——尤其还与近臣共享——便可能将一时私人的失察,扩展为更广泛的伦理与政治之祸。
तक्षक उवाच