Ādi-parva Adhyāya 33: Vāsuki’s Council on Averting the Sarpa-satra
ज्वलनार्कप्रभं घोरं छेदन॑ं सोमहारिणाम् | घोररूपं तदत्यर्थ यन्त्र देवैः सुनिर्मितम्,वह घोर चक्र अग्नि और सूर्यके समान जाज्वल्यमान था। देवताओंने उस अत्यन्त भयंकर यन्त्रका निर्माण इसलिये किया था कि वह अमृत चुरानेके लिये आये हुए चोरोंके टुकड़े-टुकड़े कर डाले
那可怖的轮盘光焰炽盛,如火如日。诸天神铸造此极其凶厉的机关,为的是将前来盗取甘露的窃贼斩碎成段。
शौनक उवाच