समन्तपञ्चक-आख्यानम् तथा अक्षौहिणी-प्रमाणनिर्णयः
Samantapañcaka Narrative and the Measure of an Akṣauhiṇī
एवं भविष्यतीत्येवं पितरस्तमथाब्रुवन् । तं क्षमस्वेति निषिषिधुस्ततः स विरराम ह,तदनन्तर 'ऐसा ही होगा” यह कहकर पितरोंने वरदान दिया। साथ ही “अब बचे-खुचे क्षत्रियवंशको क्षमा कर दो'--ऐसा कहकर उन्हें क्षत्रियोंक संहारसे भी रोक दिया। इसके पश्चात् परशुरामजी शान्त हो गये
于是祖灵对他说:“必将如是。”并赐下恩许。又告诫道:“当宽恕尚存的刹帝利族裔。”由此也制止他继续屠戮刹帝利。其后,帕罗修罗摩(Paraśurāma)心火渐息,归于宁静。
राम उवाच