कल्माषपाद-शाप-कारणम्
Cause of Kalmāṣapāda’s Niyoga under a Curse
प्रज्ञया वयसा चैव वृद्धः कीर्त्या नयेन च । अमात्यस्तं समुत्थाप्य बभूव विगतज्वर:,राजमन्त्री अवस्थामें तो बड़े-बूढ़े थे ही, बुद्धि, कीर्ति और नीतिमें भी बढ़े-चढ़े थे। उन्होंने जैसे पिता अपने गिरे हुए पुत्रको धरतीसे उठा ले, उसी प्रकार कामवेदनासे मूर्च्छित हुए भूमिपालोंके भी स्वामी महाराज संवरणको शीतघ्रतापूर्वक पृथ्वीपरसे उठा लिया। राजाको उठाकर और उन्हें जीवित पाकर उनकी चिन्ता दूर हो गयी
prajñayā vayasā caiva vṛddhaḥ kīrtyā nayena ca | amātyas taṃ samutthāpya babhūva vigatajvaraḥ ||
那位大臣年高德劭,兼具智慧、声望与治国之道,遂将君王扶起。扶起之后,他那如热病般的忧惧便消退了,因为统治者已得以复原。
गन्धर्व उवाच