कल्माषपाद-शाप-कारणम्
Cause of Kalmāṣapāda’s Niyoga under a Curse
त॑ समुत्थापयामास नृपतिं काममोहितम् | भूतलाद भूमिपालेशं पितेव पतितं सुतम्,राजमन्त्री अवस्थामें तो बड़े-बूढ़े थे ही, बुद्धि, कीर्ति और नीतिमें भी बढ़े-चढ़े थे। उन्होंने जैसे पिता अपने गिरे हुए पुत्रको धरतीसे उठा ले, उसी प्रकार कामवेदनासे मूर्च्छित हुए भूमिपालोंके भी स्वामी महाराज संवरणको शीतघ्रतापूर्वक पृथ्वीपरसे उठा लिया। राजाको उठाकर और उन्हें जीवित पाकर उनकी चिन्ता दूर हो गयी
taṁ samutthāpayāmāsa nṛpatiṁ kāmamohitam | bhūtalād bhūmipāleśaṁ pitevā patitaṁ sutam ||
乾闼婆扶起那位被欲望迷惑的君王。他将大地之主从地上抬起,宛如父亲扶起跌倒的儿子一般,使其从情欲的昏厥中复苏,也宽解了周遭众人的忧惧。
गन्धर्व उवाच