Ādi-parva Adhyāya 132 — Duryodhana’s Instructions to Purocana at Vāraṇāvata
Lākṣāgṛha Planning
ददर्श मलदिग्धाड़ं जटिलं चीरवाससम् । एकलव्यं धनुष्याणिमस्यन्तमनिशं शरान्,वहाँ पहुँचकर उन्होंने एकलव्यको देखा, जो हाथमें धनुष ले निरन्तर बाणोंकी वर्षा कर रहा था। उसके शरीरपर मैल जम गया था। उसने सिरपर जटा धारण कर रखी थी और वस्त्रके स्थानपर चिथड़े लपेट रखे थे
到了那里,他们看见埃迦拉维耶:浑身污垢,发结成髻,身披破布以代衣裳;手执弓弦,不停地放射箭矢,如雨不绝。
वैशम्पायन उवाच