सुभद्राहरणम्
Subhadrā-haraṇa: Arjuna’s Taking of Subhadrā and the Dvārakā Assembly’s Response
श्रुत्वैव च महाबाहुर्मा भैरित्याह त॑ द्विजम् । वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! वह ब्राह्मण निकट आकर बहुत रो रहा था। पाण्डुपुत्र कुन्तीनन्दन धनंजयने उसकी कही हुई सारी बातें सुनीं और सुनकर उन महाबाहुने उस ब्राह्मणसे कहा--'डरो मत”
śrutvaiva ca mahābāhur mā bhair ity āha taṁ dvijam |
Vaiśampāyana nói: Vừa nghe xong, vị anh hùng tay mạnh liền bảo vị brāhmaṇa ấy: “Đừng sợ.”
वैशम्पायन उवाच