पाण्डोः प्रेतकार्य-सम्पादनम्
Pāṇḍu’s Funeral Rites and Public Mourning
अहं हि किंदमो नाम तपसा भावितो मुनि: । व्यपत्रपन्मनुष्याणां मृग्यां मैथुनमाचरम्,मेरा नाम किंदम है। मैं तपस्यामें संलग्न रहनेवाला मुनि हूँ, अतः मनुष्योंमें--मानव- शरीरसे यह काम करनेमें मुझे लज्जाका अनुभव हो रहा था। इसीलिये मृग बनकर अपनी मृगीके साथ मैथुन कर रहा था। मैं प्रायः इसी रूपमें मृगोंके साथ घने वनमें विचरता रहता हूँ। तुम्हें मुझे मारनेसे ब्रह्महत्या तो नहीं लगेगी; क्योंकि तुम यह बात नहीं जानते थे (कि यह मुनि है)
ahaṃ hi kiṃdamo nāma tapasā bhāvito muniḥ | vyapatrapan manuṣyāṇāṃ mṛgyāṃ maithunam ācaram |
“Ta là hiền giả tên Kiṃdama, được tôi luyện bởi khổ hạnh. Xấu hổ khi phải giao hoan trong thân người giữa chốn nhân gian, ta đã mang hình nai và phối ngẫu với nai cái của ta.”
मृग उवाच