सहदेवस्य गोसंख्य-तन्तिपाल-रूपेण विराट-समागमः | Sahadeva’s Audience with Virāṭa as Cattle-Enumerator
Tantipāla
सा समीक्ष्य तथारूपामनाथामेकवाससम् | समाहूयाब्रवीद् भद्रे का त्वं कि च चिकीर्षसि,वह एक वस्त्र धारण किये थी एवं अनाथा-सी जान पड़ती थी। ऐसे दिव्य रूपवाली तरुणीको उस अवस्थामें देखकर रानीने उसे अपने पास बुलाया और पूछा--“भद्रे! तुम कौन हो और क्या करना चाहती हो?”
اسے اس طرح کے دلکش روپ میں، ایک ہی لباس پہنے اور بے سہارا سی دیکھ کر ملکہ نے اسے بلایا اور کہا—“اے بھدرے! تو کون ہے، اور کیا کرنا چاہتی ہے؟”
वैशम्पायन उवाच