अर्जुन-कर्ण-सङ्ग्रामः
Arjuna–Karna Engagement in the Cattle-Raid Aftermath
आशीविषस्य क्रुद्धस्य पाणिमुद्यम्य दक्षिणम् । अवमुच्य प्रदेशिन्या दंष्टामादातुमिच्छसि,सूतपुत्र! (अर्जुनके साथ अकेले भिड़नेका साहस करके) तुम मानो क्रोधमें भरे हुए विषधर सर्पके मुखमें अपना दाहिना हाथ उठाकर डालना और तर्जनी अंगुलीसे उसके दाँत उखाड़ लेना चाहते हो
اے سوت پُتر! (ارجن سے اکیلے بھڑنے کی جسارت کر کے) تم گویا غضبناک زہریلے سانپ کے منہ میں اپنا دایاں ہاتھ اٹھا کر ڈالنا اور شہادت کی انگلی سے اس کے دانت نوچ لینا چاہتے ہو۔
कृप उवाच