कृपकर्णसंवादः
Kṛpa’s Counsel to Karṇa on Deśa-Kāla and Coordinated Strategy
पृथिव्यां चतुरन्तायां वर्णो मे दुर्लभ: सम: । करोमि कर्म शुक्लं च तस्मान्मामर्जुनं विदु:,(अर्जुन शब्दके तीन अर्थ हैं--वर्ण या दीप्ति, ऋजुता या समता, धवल या शुद्ध।) चारों ओर समुद्रपर्यन्त पृथ्वीपर मेरे-जैसी दीप्ति दुर्लभ है। मैं सबके प्रति समभाव रखता हूँ और शुद्ध कर्म करता हूँ। इसी कारण विज्ञ पुरुष मुझे “अर्जुन” के नामसे जानते हैं
arjuna uvāca | pṛthivyāṃ caturantāyāṃ varṇo me durlabhaḥ samaḥ | karomi karma śuklaṃ ca tasmān mām arjunaṃ viduḥ |
چاروں طرف سمندر سے گھری اس زمین پر میری سی تابانی نایاب ہے۔ میں سب کے ساتھ یکساں رویّہ رکھتا ہوں اور پاکیزہ اعمال کرتا ہوں؛ اسی لیے اہلِ دانش مجھے ‘ارجن’ کے نام سے جانتے ہیں۔
अर्जुन उवाच