Dhaumya’s Counsel on Incognito Conduct in a Royal Household (राजवसतौ आचरण-निति)
न कर्मणि नियुक्त: सन् धनं किज्चिदपि स्पृशेत् । प्राप्रोति हि हरन् द्रव्यं बन्धनं यदि वा वधम्,यदि राजाने किसी कामपर नियुक्त किया हो, तो उसमें घूसके रूपमें थोड़ा भी धन न ले; क्योंकि जो इस प्रकार चोरीसे धन लेता है, उसे एक दिन बन्धन अथवा वधका दण्ड भोगना पड़ता है
اگر بادشاہ نے کسی کام پر مقرر کیا ہو تو اس میں رشوت کے طور پر ذرا سا مال بھی ہاتھ نہ لگائے؛ کیونکہ اس طرح مال ہڑپ کرنے والا آخرکار قید یا قتل کی سزا پاتا ہے۔
धौग्य उवाच