Virāṭa-parva Adhyāya 29 — Suśarmā’s Counsel and the Coordinated Goharaṇa Plan
तात बुद्धयापि तत् सर्व बुध्यस्व बलमात्मन: | नियत सर्वमित्रेषु बलवत्स्वबलेषु च,“तात! तुम स्वयं बुद्धिसे भी विचारकर अपनी सम्पूर्ण शक्ति कितनी है, इसकी जानकारी प्राप्त कर लो। तुम्हारे बलवान् और निर्बल सब प्रकारके मित्रोंमें निश्चित बल कितना है, यह भी जान लेना चाहिये
اے تات! تم خود اپنی عقل سے غور کر کے اپنی پوری قوت کا صحیح اندازہ کر لو؛ اور اپنے تمام دوستوں میں—خواہ طاقتور ہوں یا کمزور—ان کی متعین قوت بھی جان لو۔
वैशम्पायन उवाच