Udyoga-parva Adhyāya 47 — Arjuna’s Deterrent Declaration
Sañjaya’s Report
अयं सम युद्धे मन्यते<न्यैरजेयं तमेकलव्यं नाम निषादराजम् | वेगेनैव शैलमभिहत्य जम्भ: शेते स कृष्णेन हत: परासु:,“ये भगवान् श्रीकृष्ण उस निषादराज एकलव्यको सदा युद्धके लिये ललकारा करते थे, जो दूसरोंके लिये अजेय था; परंतु वह श्रीकृष्णके हाथसे मारा जाकर प्राणशून्य हो सदाके लिये रणशय्यामें सो रहा है, ठीक उसी तरह, जैसे जम्भ नामक दैत्य स्वयं ही वेगपूर्वक पर्वतपर आघात करके प्राणशून्य हो महानिद्रामें निमग्न हो गया था
ayaṁ samyuddhe manyate 'nyair ajeyaṁ tam ekalavyaṁ nāma niṣādarājam | vegenaiva śailam abhihatya jambhaḥ śete sa kṛṣṇena hataḥ parāsuḥ ||
سنجے نے کہا—یہ نشاد راجا ایکلویہ، جسے دوسرے لوگ جنگ میں ناقابلِ تسخیر سمجھتے تھے، اسے بھگوان شری کرشن بار بار میدانِ کارزار کے لیے للکارتے رہے۔ مگر آج وہ کرشن کے ہاتھوں مارا گیا، بے جان ہو کر رن بھومی میں پڑا ہے—جیسے جمبھ نامی دیو نے اپنے ہی زور سے پہاڑ پر ٹکر ماری اور جان سے گیا، اور موت کی نیند میں ڈوب گیا۔
संजय उवाच