उद्योगपर्व — विदुरनीतिः (Adhyāya 37): आयुःक्षयहेतवः, नीतिसूत्राणि, बलभेदाः, पाण्डव-विग्रहदोषदर्शनम्
स्थानवृद्धिक्षयज्ञस्य षाड्गुण्यविदितात्मन: । अनवज्ञातशीलस्य स्वाधीना पृथिवी नूप,राजन! जो सन्धि, विग्रह आदि छ: गुणोंकी जानकारीके कारण प्रसिद्ध है, स्थिति, वृद्धि और हासको जानता है तथा जिसके स्वभावकी सब लोग प्रशंसा करते हैं, उसी राजाके अधीन पृथ्वी रहती है
اے راجن! جو صلح و جنگ وغیرہ چھ تدبیروں (شادگُنیہ) کا جاننے والا ہو، حالت، ترقی اور زوال کو پہچانتا ہو، اور جس کے کردار کو کہیں حقیر نہ سمجھا جاتا ہو—زمین اسی کے تابع رہتی ہے۔
विदुर उवाच