अम्बा–राम–भीष्म संवादः
Amba–Rama–Bhishma Dialogue on Vow and Refuge
इति ब्रुवाणं तमहं राम परपुरंजयम् | प्रणम्य शिरसा राममेवमस्त्वित्यथाब्रुवम्,शत्रुओंकी नगरीपर विजय पानेवाले परशुरामजीको इस प्रकार कहते देख मैंने मस्तक झुकाकर उन्हें प्रणाम किया और “एवमस्तु” कहकर उनकी आज्ञा स्वीकार की
iti bruvāṇaṃ tam ahaṃ rāma parapuraṃjayam | praṇamya śirasā rāmam evam astv ity athābruvam ||
جب دشمنوں کے شہروں کو فتح کرنے والے رام (پرشورام) نے یوں کہا تو میں نے سر جھکا کر انہیں پرنام کیا اور ‘ایومَستو’ کہہ کر ان کی فرمانبرداری قبول کی۔
भीष्म उवाच