स्वर्गारोहणपर्व — तृतीयोऽध्यायः
Indra and Dharma’s Consolation; Celestial Gaṅgā Purification
एवमुक्त: स राजर्षिस्तव पूर्वपितामह: । जगाम सह धर्मेण सर्वैक्ष त्रिदिवालयै:,जनमेजय! धर्मके यों कहनेपर तुम्हारे पूर्वपितामह राजर्षि युधिष्ठिरने धर्म तथा समस्त स्वर्गवासी देवताओंके साथ जाकर मुनिजनवन्दित परम पावन पुण्यसलिला देवनदी गड़ाजीमें स्नान किया। स्नान करके राजाने तत्काल अपने मानवशरीरको त्याग दिया
evam uktaḥ sa rājarṣis tava pūrva-pitāmahaḥ | jagāma saha dharmeṇa sarvaiś ca tridivālayaiḥ, janamejaya |
ویشَمپایَن نے کہا—اے جنمیجَے! جب دھرم نے یوں کہا تو تمہارے پیش رو، راجرشی (یُدھشٹھِر)، دھرم کے ساتھ اور سوَرگ کے سب باشندوں کے ساتھ روانہ ہوئے۔
वैशम्पायन उवाच