Prāyaścitta and Contextual Non-Culpability (प्रायश्चित्त-निमित्त-अदोषवाद)
स राजन मोक्ष्यसे पापात् तेन पूर्णेन हेतुना । प्राणार्थ वा धनेनैषामथवा नृपकर्मणा,नरेश्वर! तुमने तो अपने प्राणोंकी रक्षा, धनकी प्राप्ति अथवा राजोचित कर्तव्यका पालन करनेके लिये ही शत्रुओंका वध किया है; अत: इतना ही पर्याप्त कारण है, जिससे तुम पापमुक्त हो जाओगे
اے نریشور! تم نے تو اپنی جان کی حفاظت، دولت کے حصول یا شاہانہ فریضے کی ادائیگی کے لیے ہی دشمنوں کا وध کیا ہے؛ پس یہی کامل سبب ہے جس سے تم گناہ سے آزاد ہو جاؤ گے۔
व्यास उवाच