Adhyāya 284: Tapas as a Corrective to Household Attachment
Parāśara’s Instruction
त्रैलोक्यगोप्ता गोविन्दो गोमार्गोडमार्ग एव च | श्रेष्ठ: स्थिरश्न स्थाणुश्न निष्कम्प: कम्प एव च,आप अधर्मके नाशक, महापार्श्च, चण्डधार, गणाधिप, गोनर्द, गौओंको आपत्तिसे बचानेवाले, नन्न्दीकी सवारी करनेवाले, त्रैलोक्यरक्षक, गोविन्द (श्रीकृष्णरूप), गोमार्ग (इन्द्रियोंके संचालक), अमार्ग (इन्द्रियोंके अगोचर), श्रेष्ठ, स्थिर, स्थाणु, निष्कम्प, कम्प, दुर्वरण (जिनका सामना करना कठिन है, ऐसे), दुर्विषह (असहा वेगवाले), दुःसह, दुर्लडघ्य, दुर्द्धर्ष, दुष्प्र कम्प, दुर्विष, दुर्जय, जय, शश (शीघ्रगामी), शशांक (चन्द्रमा) तथा शमन (यमराज) हैं। सर्दी-गर्मी, क्षुधा, वृद्धावस्था तथा मानसिक चिन्ताको दूर करनेवाले भी आप ही हैं। आप ही आधि-व्याधि तथा उसे दूर करनेवाले हैं
trailokyagoptā govindo gomārgo ’mārga eva ca | śreṣṭhaḥ sthiraḥ sthāṇuś ca niṣkampāḥ kampa eva ca ||
بھیشم نے کہا— آپ تینوں لوکوں کے نگہبان، گووند ہیں۔ آپ ہی حواس کے لیے ‘راہ’ ہیں اور حواس سے ماورا ‘بے راہ’ بھی۔ آپ برتر، ثابت قدم، ستونِ بے جنبش ہیں؛ آپ بے لرزش بھی ہیں اور حرکت کا اصول بھی۔
भीष्म उवाच