Adhyāya 270 — Yudhiṣṭhira’s inquiry on saṃnyāsa; Bhīṣma on calculable time, tamas, and karma
Vṛtra–Uśanā exemplum begins
शमेन तपसा चैव भक््त्या च निरुपस्कृत: । शुद्धात्मा ब्राह्मणो रात्रौ निदर्शनमपश्यत,वह शम-दम, तप और भक्तिभावसे सम्पन्न, भोगरहित तथा शुद्धचित्तवाला था। उस ब्राह्मणको रातमें कुछ ऐसा दृष्टान्त दिखायी दिया, जिससे उसे कुण्डधारके प्रति अपनी भक्तिका परिचय मिल गया
وہ شَم و دَم، تپسیا اور بھکتی بھاؤ سے آراستہ، لذّتوں سے بے نیاز اور پاکیزہ دل تھا۔ رات کے وقت اس برہمن کو ایسا ایک نظارہ دکھائی دیا جس سے کُنڈدھار کے لیے اس کی عقیدت ظاہر ہو گئی۔
भीष्म उवाच