असंतोषादिदोष-निरूपणम्
On the Faults of Discontent and the Discipline of Detachment
ते जनास्तां गति यान्ति नाविद्वांसो5ल्पचेतस: । नाबुद्धयो नातपस: सर्व बुद्धौ प्रतेष्ठितम्,बुद्धिमान् और तपस्वी ही उस गतिको प्राप्त होते हैं। जो अज्ञानी, मन्दबुद्धि, शुद्धबुद्धिसे रहित और तपस्यासे शून्य हैं--वे नहीं। क्योंकि सब कुछ बुद्धिमें ही प्रतिष्ठित है
اس اعلیٰ گتی کو وہی پاتے ہیں جو دانا، بلندہمت، صاحبِ عقل اور تپسوی ہوں۔ جو جاہل، کم فہم، پاکیزہ عقل سے محروم اور تپسیا سے خالی ہیں—وہ نہیں پاتے؛ کیونکہ سب کچھ عقل ہی میں قائم ہے۔
युधिछिर उवाच