बक-गौतमाख्यानम् / The Baka–Gautama Account
On Gratitude and Friendship Ethics
अकृष्टाश्वैव हंसाश्चन ऋषयो वाग्नियोनय: । वानप्रस्था: पृश्रयश्च स्थिता ब्रह्मानुशासने,भृगु, अत्रि और अड्जिरा-ये सिद्ध मुनि, तपस्याके धनी काश्यपगण, वसिष्ठ, गौतम, अगस्त्य, देवर्षि नारद, पर्वत, वालखिल्य ऋषि, प्रभास, सिकत, घृतप (घी पीकर रहनेवाले), सोमप (सोमपान करनेवाले), वायव्य (वायु पीकर रहनेवाले), मरीचिप (सूर्यकी किरणोंका पान करनेवाले) और वैश्वानर तथा अकृष्ट (बिना जोते-बोये उत्पन्न हुए अन्नसे जीविका चलानेवाले), हंसमुनि (संन्यासी), अग्निसे उत्पन्न होनेवाले ऋषिगण, वानप्रस्थ और पृश्चरिगण--ये सभी महात्मा ब्रह्माजीकी आज्ञाके अधीन रहकर सनातनधर्मका पालन करने लगे
bhīṣma uvāca |
akṛṣṭāś caiva haṃsāś ca ṛṣayo vāgnayonayaḥ |
vānaprasthāḥ pṛśrayāś ca sthitā brahmānuśāsane ||
بھیشم نے کہا—اکرِشٹ (بغیر جوتے بوئے اُگے اناج پر گزارا کرنے والے)، ہنس تپسوی، آگنی-یونی سے پیدا ہونے والے رِشی، وانپرستھ اور پِرشریہ تپسوی—یہ سب برہما کے انوشاسن میں قائم رہ کر سناتن دھرم کو تھامے ہوئے ہیں۔
भीष्म उवाच