आत्मदोष-उपदेशः तथा भीम-धृष्टद्युम्नयोः संयोगः
Self-Causation Counsel and the Bhīma–Dhṛṣṭadyumna Convergence
इस प्रकार श्रीमह्ो भारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें पाँचवें दिवसके युद्धका आरम्भविषयक उनहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ ६९ ॥ [दाक्षिणात्य अधिक पाठके ५ ई श्लोक मिलाकर कुल ३९ ६ श्लोक हैं।] नल + (0) आज अत+- सप्ततितमो<ध्याय: भीष्म और भीमसेनका घमासान युद्ध संजय उवाच अकरोत तुमुल॑ युद्ध भीष्म: शान्तनवस्तदा । भीमसेनभयादिच्छन पुत्रांस्तारयितुं तव,संजय कहते हैं--महाराज! आपके पुत्रोंको भीमसेनके भयसे छुड़ानेकी इच्छा रखकर उस दिन शान्तनुनन्दन भीष्मने बड़ा भयंकर युद्ध किया
sañjaya uvāca | akarot tumulaṃ yuddhaṃ bhīṣmaḥ śāntanavas tadā | bhīmasenabhayād icchan putrāṃs tārayituṃ tava ||
سنجے نے کہا—مہاراج! اُس دن شانتنو کے بیٹے بھیشم نے، بھیم سین کے خوف سے تمہارے بیٹوں کو بچانے کی خواہش میں، نہایت ہنگامہ خیز اور ہولناک جنگ کی۔
संजय उवाच