Yuga-Lakṣaṇa and Varṣa-Pramāṇa Inquiry (युगलक्षण–वर्षप्रमाण–प्रश्न)
संजय उवाच सर्वेष्वेव महाराज द्वीपेषु कुरुनन्दन | गौर: कृष्णश्न वर्णो द्वौ तयोर्वर्णान्तरं नृप,संजयने कहा--महाराज कुरुनन्दन! सम्पूर्ण द्वीपोंमें गौर, कृष्ण तथा इन दोनों वर्णोका सम्मिश्रण देखा जाता है। भारत! यह पर्वत जिस कारणसे श्याम होकर दूसरोंमें भी श्यामता उत्पन्न करनेवाला हुआ, वह आपको बताता हूँ। यहाँ भगवान् श्रीकृष्ण निवास करते हैं; अतः उन्हींकी कान्तिसे यह (स्वयं भी) श्यामताको प्राप्त हुआ है (और अपने समीप रहनेवाली प्रजामें भी श्यामता उत्पन्न कर देता है)
sañjaya uvāca sarveṣv eva mahārāja dvīpeṣu kurunandana | gauraḥ kṛṣṇaś ca varṇo dvau tayoḥ varṇāntaraṃ nṛpa ||
سنجے نے کہا—اے مہاراج، اے کوروؤں کے نندن! تمام جزیروں (خطّوں) میں دو بڑے رنگ—گورا اور سیاہ—اور ان دونوں کے درمیان کے ملے جلے رنگ بھی دیکھے جاتے ہیں، اے نریپ۔
संजय उवाच