अश्वमेध-उपदेशः तथा मरुत्त-यज्ञ-धन-प्रसङ्गः
Counsel on Aśvamedha and the Marutta-treasure episode
युधिषछ्िर उवाच असंशयं वाजिमेध: पावयेत् पृथिवीमपि । अभिप्रायस्तु मे कश्रित् त॑ त्वं श्रोतुमिहाहसि,युधिछिरने कहा--विप्रवर! इसमें संदेह नहीं कि अश्वमेध यज्ञ सारी पृथ्वीको भी पवित्र कर सकता है, किंतु इसके विषयमें मेरा एक अभिप्राय है, उसे आप यहाँ सुन लें
یُدھِشٹھِر نے کہا—اے برہمنِ برتر! اس میں کوئی شک نہیں کہ اشومیدھ یَجْن پوری زمین کو بھی پاک کر سکتا ہے۔ مگر اس کے بارے میں میرے دل میں ایک ارادہ ہے؛ آپ یہاں اسے سن لیجیے۔
युधिषछ्िर उवाच