ऑपन--माज बक। अकाल पञ्चनवतितमो< ध्याय: कौरव-सेनाका शिबिरकी लक पलायन और शिबिरोंमें प्रवेश संजय उवाच हते वैकर्तने राजन् कुरवो भयपीडिता: । वीक्षमाणा दिश: सर्वा: पयपितु: सहस्रश:,संजय कहते हैं--राजन्! वैकर्तन कर्णके मारे जानेपर भयसे पीड़ित हुए सहस्रों कौरव योद्धा सम्पूर्ण दिशाओंकी ओर देखते हुए भाग निकले इस प्रकार श्रीमह्ा भारत कर्णपर्वमें कौरव-सेनाका शिबिरकी ओर प्रस्थानविषयक पंचानबेवाँ अध्याय प्रा हुआ ॥/ ९५ ॥। ऑपन--#र< बक। है २ >> षण्णवतितमोब< ध्याय: युधिष्ठिरका रणभूमिमें कर्णको मारा गया देखकर प्रसन्न हो श्रीकृष्ण और अर्जुनकी प्रशंसा करना, धृतराष्ट्रका शोकमग्न होना तथा कर्णपर्वके श्रवणकी महिमा संजय उवाच तथा निपतिते कर्णे परसैन्ये च विद्रुते आश््लिष्य पार्थ दाशाहों हर्षाद् वचनमब्रवीत्
sañjaya uvāca | hate vaikarṭane rājan kuravo bhayapīḍitāḥ | vīkṣamāṇā diśaḥ sarvāḥ pradrutāḥ sahasraśaḥ ||
Sabi ni Sañjaya: “O Hari, nang mapatay si Vaikartana (Karna), ang mga mandirigmang Kuru—dinurog ng takot—ay lumingon sa lahat ng dako at nagsitakas nang libu-libo. Ang pagbagsak ng kanilang pangunahing kampeon ang sumira sa kanilang loob, at ang sindak ay kumalat sa buong hukbo.”
संजय उवाच