Adhyāya 14: Sudēṣṇā Sends Sairandhrī to Kīcaka’s House (सुदेष्णा–सैरन्ध्री–कीचक संवादः)
सैरन्ध्युवाच मा सूतपुत्र मुहास्व माद्य त्यक्ष्यस्व जीवितम् । जानीहि पज्चभिषररिर्नित्यं मामभिरक्षिताम्,सैरन्ध्री बोली--सूतपुत्र! तू आज इस प्रकार मोहके फंदेमें न पड़। अपनी जान न गँवा। तुझे मालूम होना चाहिये कि पाँच भयंकर गन्धर्व मेरी नित्य रक्षा करते हैं
ไซรันธรีกล่าวว่า “โอ บุตรแห่งสารถี อย่าหลงมัวเมาในวันนี้จนต้องสละชีวิต จงรู้ไว้ว่า มีคันธรรพผู้เกรี้ยวกราดห้าตนคุ้มครองข้าอยู่เป็นนิตย์”
वैशम्पायन उवाच