Lokapāla-samāgamaḥ—Arjuna Receives Astras from the World-Guardians
Book 3, Chapter 42
ऐरावतं चतुर्दन्तं कैलासमिव शृद्धिणम् । स सिद्धमार्गमाक्रम्य कुरुपाण्डवसत्तम:,तदनन्तर अर्जुनने स्वर्गद्वारपर खड़े हुए सुन्दर विजयी गजराज ऐरावतको देखा, जिसके चार दाँत बाहर निकले हुए थे। वह ऐसा जान पड़ता था, मानो अनेक शिखरोंसे सुशोभित कैलास पर्वत हो। कुरु-पाण्डव-शिरोमणि अर्जुन सिद्धोंके मार्गपर आकर वैसे ही शोभा पाने लगे, जैसे पूर्वकालमें भूपालशिरोमणि मान्धाता सुशोभित होते थे। कमलनयन अर्जुनने उन पुण्यात्मा राजाओंके लोकोंमें भ्रमण किया
airāvataṁ caturdantaṁ kailāsam iva śṛṅgiṇam | sa siddhamārgam ākramya kuru-pāṇḍava-sattamaḥ ||
ไวศัมปายนะกล่าวว่า—อรชุนผู้เลิศในหมู่กุรุและปาณฑพ ได้เห็นไอราวตะผู้มีงาสี่งา สูงตระหง่านดุจเขาไกรลาสที่ประดับด้วยยอดน้อยใหญ่; แล้วเขาก็ก้าวขึ้นสู่หนทางที่เหล่าสิทธะสัญจร
वैशम्पायन उवाच