विद्यमानेषु शस्त्रेषु यद्यमोघामसंशये । प्रमत्तो मोक्ष्यसे चापि त्वय्येवैषा पतिष्यति,वक्ताओंमें श्रेष्ठ कर्ण! तुम्हारे पिताका जैसा वर्ण और तेज है, वैसे ही वर्ण और तेजसे तुम पुनः सम्पन्न हो जाओगे। जबतक तुम्हारे पास दूसरे शस्त्र रहें और प्राणसंकटकी परिस्थिति न आ जाय, तबतक तुम यदि प्रमादवश यह अमोघ शक्ति यों ही किसी शत्रुपर छोड़ दोगे तो यह उसे न मारकर तुम्हारे ही ऊपर आ पड़ेगी
vidyamāneṣu śastreṣu yady amoghām asaṁśaye | pramatto mokṣyase cāpi tvayy evaiṣā patiṣyati ||
ตราบใดที่เจ้ายังมีศาสตราอื่นอยู่ หากเจ้าเผลอไผลปล่อยอาวุธอันไม่พลาดนี้ออกไป ก็ปราศจากข้อสงสัย มันจะไม่สังหารศัตรู หากแต่จะย้อนกลับมาตกต้องตัวเจ้าเอง
कर्ण उवाच