Setubandha-Niścaya (Decision for the Causeway) and Vānara-Senā Saṃniveśa — Bridge Strategy and Alliance Consolidation
#::732:.8 #::3::.7 () हि 2 7 षट्षष्ट्यधिकद्विशततमो< ध्याय: द्रौपदीका कोटिकास्यको उत्तर वैशम्पायन उवाच अथाब्रवीद् द्रौपदी राजपुत्री पृष्टा शिबीनां प्रवरेण तेन । अवेक्ष्य मन्दं प्रविमुच्य शाखां संगृह्लती कौशिकमुत्तरीयम्,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! शिबिदेशके प्रमुख वीर कोटिकास्यके इस प्रकार पूछनेपर राजकुमारी द्रौपदी कदम्बकी वह डाली छोड़कर अपनी रेशमी ओढ़नीको सँभालती हुई संकोचपूर्वक उसकी ओर देखकर बोली-- इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत द्रौपवीहरणपर्वमें द्रौपदीवाक्यविषयक दो सौ छाछठवाँ अध्याय प्रा हुआ ॥/ २६६ ॥/ हि न (0) है 7 7 सप्तषष्ट्याधिकद्विशततमो< ध्याय: जयद्रथ और द्रौपदीका संवाद वैशम्पायन उवाच तथा<<सीनेषु सर्वेषु तेषु राजसु भारत । यदुक्त कृष्णया सार्ध तत् सर्व प्रत्यवेदयत्
Vaiśampāyana uvāca: athābravīd draupadī rājaputrī pṛṣṭā śibīnāṃ pravareṇa tena | avekṣya mandaṃ pravimucya śākhāṃ saṃgṛhlatī kauśikam uttarīyam ||
ไวศัมปายนะกล่าวว่า—ครั้นแล้ว เทราปที พระราชธิดา เมื่อถูกวีรบุรุษผู้เลิศแห่งชาวศิพีผู้นั้นซักถาม ก็ได้กล่าวตอบ นางเหลือบมองอย่างสงบด้วยความละอาย ปล่อยกิ่งไม้ที่จับไว้ แล้วรวบจัดผ้าคลุมบ่าผ้าไหมของตน ก่อนจะเอ่ยวาจาต่อเขาด้วยความสำรวม
वैशम्पायन उवाच