Draupadī’s Instruction on Marital Conduct and Household Discipline (चित्तग्रहण-उपदेश)
हि ० आय न | हि 7 आम ३. तप अर्थात् पांचजन्यके जो पूर्वोक्त चालीस पुत्र बताये गये हैं, उनके सिवा, पाँच पुत्र और भी उन्होंने उत्पन्न किये थे। उनके नाम क्रमश: इस प्रकार हैं--पुरंदर, ऊष्मा, मनु, शम्भु और आवसथ्य। उनका तीसरेसे छठे श्लोकतक वर्णन है। २. श्रुति भी कहती है--“आदित्यो वा अस्तं यन्नग्निमनुप्रविशति ।” ३. बलद, मन्युमान् तथा विष्णु नामक अग्नि भानुकी भार्या सुप्रजासे उत्पन्न हैं। इसी प्रकार “आग्रयण' “अग्रह” और 'स्तुभ'--ये तीन अग्नि बृहद्भधासाकी संतान हैं। - मिट्टीके प्याले या पुरवेका नाम कपाल है। द्वाविशर्त्याधिकॉद्विशततमो< ध्याय: सह नामक अग्निका जलनमें प्रवेश और अथर्वा अंगिराद्धारा पुन:उनका प्राकट्य मार्कण्डेय उवाच आपस्य मुदिता भार्या सहस्य परमा प्रिया । भूपतिर्भुवभर्ता च जनयत् पावकं परम्,मार्कण्डेयजी कहते हैं--राजन्! जलमें निवासके कारण प्रसिद्ध हुए 'सह” नामक अग्निके एक परम प्रिय पत्नी थी जिसका नाम था मुदिता। उसके गर्भसे भूलोक और भुवर्लोकके स्वामी सहने “अद्भुत'- नामक उत्कृष्ट अग्निको उत्पन्न किया
mārkaṇḍeya uvāca | āpasya muditā bhāryā sahasya paramā priyā | bhūpatir bhuvabhartā ca janayat pāvakaṃ param ||
มารกัณฑेयกล่าวว่า: ข้าแต่พระราชา อัคนีผู้มีนามว่า ‘สหะ’—ได้ชื่อนั้นเพราะเกี่ยวข้องกับสายน้ำ—มีชายาอันเป็นที่รักยิ่งชื่อ ‘มุทิตา’ องค์ผู้เป็นเจ้าแห่งแผ่นดินและผู้ค้ำจุนโลกทั้งหลายนั้น ได้ให้กำเนิดผ่านนางซึ่งไฟอันประเสริฐยิ่ง เป็นเปลวอัศจรรย์นามว่า ‘อัทภูตะ’
मार्कण्डेय उवाच
The verse underscores ordered continuity in the cosmos: even divine forces like Fire are presented through lawful relationships and named lineages, suggesting that stability of the worlds (bhuvabhartā) rests on dharmic order and proper generation.
Mārkaṇḍeya narrates a genealogical/cosmic account: the Agni named Saha, associated with waters, has a beloved wife Muditā, and through her he produces a supreme Fire called Pāvaka.