Skanda–Mātṛgaṇa-janma: Kumārakāḥ, Kanyāgaṇāḥ, and the Vīrāṣṭaka (स्कन्द-मातृगण-सम्भवः)
दाम्भिको दुष्कृतः प्रायः शूद्रेण सदृूशो भवेत् । मैं तो अभी आपको ब्राह्मण मानता हूँ। आपके ब्राह्मण होनेमें संदेह नहीं है। जो ब्राह्मण होकर भी पतनके गर्तमें गिरानेवाले पापकर्मोंमें फँसा हुआ है और प्राय: दुष्कर्मपरायण तथा पाखंडी है, वह शूद्रके समान है
ผู้ใดเป็นพราหมณ์แต่กลับติดข้องอยู่ในกรรมอธรรมอันนำไปสู่ความเสื่อม ติดในทุจริตเป็นนิตย์ และเป็นคนโอหังลวงโลก ผู้นั้นย่อมถูกนับว่าเสมอด้วยศูทร
ब्राह्मण उवाच