आरण्यकपर्वणि अध्यायः २१६ — इन्द्र-स्कन्द-संमुखता वज्रप्रहारश्च
Indra approaches Skanda; vajra strike and the arising of Viśākha
ब्राह्मण उवाच इहाहमागतो दिष्ट्या दिष्ट्या मे सज्भतं त्वया । ईदृशा दुर्लभा लोके नरा धर्मप्रदर्शका:,ब्राह्मण बोला--नरश्रेष्ठ! मेरा बड़ा भाग्य था, जो यहाँ आया और सौभाग्यसे ही मुझे आपका संग प्राप्त हो गया। संसारमें आप-जैसे धर्मका मार्ग दिखानेवाले मनुष्य दुर्लभ हैं
พราหมณ์กล่าวว่า—โอ้ยอดบุรุษ! นับเป็นบุญวาสนาของข้าพเจ้าที่ได้มาถึงที่นี่ และด้วยโชคดีจึงได้คบหาท่าน ในโลกนี้บุรุษผู้ชี้ทางธรรมเช่นท่านหาได้ยากยิ่ง
ब्राह्मण उवाच