Kubera’s Fivefold Nīti and Protection of the Pāṇḍavas (वैश्रवणोपदेशः)
विराजमानांस्ते5पश्यंस्तिलकांस्तिलकानिव । तथानड्रशराकारान् सहकारान् मनोरमान्,खिले हुए कनेरके फूल उत्तम कर्णपूरके समान प्रतीत होते थे। इसी प्रकार वन- श्रेणियोंमें विकसित कुरबक नामक वृक्ष भी उन्होंने देखे, जो कामासक्त पुरुषोंको उत्कण्ठित करनेवाले कामदेवके बाणसमूहोंके समान जान पड़ते थे। इसी प्रकार उन्हें तिलकके वृक्ष दृष्टिगोचर हुए, जो वनश्रेणियोंके ललाटमें रचित सुन्दर तिलकके समान शोभा पा रहे थे। कहीं मनोहर मंजरियोंसे विभूषित मनोरम आम्रवृक्ष दीख पड़ते थे, जो कामदेवके बाणोंकी-सी आकृति धारण करते थे। उनकी डालियोंपर भौंरोंकी भीड़ गूँजती रहती थी। उन पर्वतोंके शिखरोंपर कितने ही ऐसे वृक्ष थे, जिनमें सुवर्णके समान सुन्दर पुष्प खिले थे। कुछ वक्षोंके पुष्प देखनेमें दावानलका भ्रम उत्पन्न करते थे। किन्हीं वृक्षोंके फूल लाल, काले तथा वैदूर्यमणिके सदृश धूमिल थे। इस प्रकार पर्वतीय शिखरोंपर विभिन्न प्रकारके पुष्पोंसे विभूषित वृक्ष बड़ी शोभा पा रहे थे
virājamānāṁs te 'paśyaṁs tilakāṁs tilakān iva | tathā nāḍraśarākārān sahakārān manoramān ||
ไวศัมปายนะกล่าวว่า—เขาทั้งหลายเห็นต้นติลกะส่องประกาย ราวกับเป็นติลกะที่แต้มไว้บนหน้าผากแห่งพงไพร และยังเห็นต้นสหการะ (มะม่วง) อันรื่นรมย์ ซึ่งมีรูปคล้ายกระจุกศร
वैशम्पायन उवाच
The verse uses vivid natural imagery to show how beauty can awaken desire; the ethical undertone is that one must remain governed by dharma and self-restraint even when the senses are attracted.
The narrator describes what the travelers see in the forested mountains: resplendent tilaka trees and charming mango trees whose shapes are compared to ornaments and to clusters of arrows.