Kuberasaras-darśana (Bhīma beholds Kubera’s guarded lotus-lake) / कुबेरसरः-दर्शनम्
प्रत्युवाच ततो भीम: सम्प्रहृष्टतनूरुह: । कृताञ्जलिरदीनात्मा हनूमन्तमवस्थितम्,वैशम्पायनजी कहते हैं-जनमेजय! हनुमानजीका वह विन्न्ध्य पर्वतके समान अत्यन्त भयंकर और अद्भुत शरीर देखकर वायुपुत्र भीमसेन घबरा गये। उनके शरीरमें रोंगटे खड़े होने लगे। उस समय उदार-हृदय भीमने हाथ जोड़कर अपने सामने खड़े हुए हनुमानूजीसे कहा--
pratyuvāca tato bhīmaḥ samprahṛṣṭa-tanūruhaḥ | kṛtāñjalir adīnātmā hanūmantam avasthitam ||
ครั้งนั้นภีมะจึงทูลตอบ กายสั่นด้วยปีติจนขนลุก เขาประนมมือด้วยใจไม่ย่อท้อ แล้วกล่าวต่อหนุมานผู้ยืนอยู่เบื้องหน้า
वैशम्पायन उवाच