Bhīmasena–Hanūmān Saṃvāda: The Tail Test and the Divine Path
चिक्षेप तरसा भीम: समन्ताद् बलिनां वर: | विनदन् सुमहातेजा नृसिंह इव दर्पितः,इसी समय गन्धमादनके शिखरोंपर महाबाहु भीमने एक परम सुन्दर केलेका बगीचा देखा, जो कई योजन दूरतक फैला हुआ था। मदकी धारा बहानेवाले महाबली गजराजकी भाँति उस कदलीवनमें हलचल मचाते और भाँति-भाँतिके वृक्षोंको तोड़ते हुए वे बड़े वेगसे वहाँ गये। वहाँके केलेके वृक्ष खम्भोंके समान मोटे थे। उनकी ऊँचाई कई ताड़ोंके बराबर थी। बलवानोंमें श्रेष्ठ भीमने बड़े वेगसे उन्हें उखाड़-उखाड़कर सब ओर फेंकना आरम्भ किया। वे महान् तेजस्वी तो थे ही, अपने बल और पराक्रमपर गर्व भी रखते थे; अतः भगवान् नृसिंहकी भाँति विकट गर्जना करने लगे। तत्पश्चात् और भी बहुत-से बड़े-बड़े जन्तुओंपर आक्रमण किया। रुरु, वानर, सिंह, भैंसे तथा जल-जन्तुओंपर भी धावा किया। उन पशु-पक्षियोंके एवं भीमसेनके उस भयंकर शब्दसे दूसरे वनमें रहनेवाले मृग और पक्षी भी थर्रा उठे
cikṣepa tarasā bhīmaḥ samantād balināṃ varaḥ | vinadan sumahātejā nṛsiṃha iva darpitaḥ ||
แล้วภีม ผู้เป็นยอดแห่งผู้มีกำลัง ก็เหวี่ยงขว้างไปทั่วทุกทิศด้วยแรงอันกราดเกรี้ยว พลางคำรามกึกก้อง เปล่งรัศมีแรงกล้า และทะนงตน ดุจนรสิงห์
वैशम्पायन उवाच