Bhīmasena–Hanūmān Saṃvāda: The Tail Test and the Divine Path
आक्रीडमानो हृष्टात्मा श्रीमान् वायुसुतो ययौ । प्रियामनोरथं कर्तुमुद्यतश्चारुलोचन:,निम्नगामिनी नदियोंसे निकला हुआ क्षोभरहित जल नीचेकी ओर इस प्रकार बह रहा था, मानो उस पर्वतका वस्त्र खिसककर गिरा जाता हो। भयसे अपरिचित और स्वस्थ हरिण मुँहमें हरे घासका कौर लिये पास ही खड़े होकर भीमसेनकी ओर कौतूहलभरी दृष्टिसे देख रहे थे। उस समय मनोहर नेत्रोंवाले शोभाशाली वायुपुत्र भीम अपने महान् वेगसे अनेक लतासमूहोंको विचलित करते हुए हर्षपूर्ण हृदयसे खेल-सा करते जा रहे थे। वे अपनी प्रिया द्रौपदीका प्रिय मनोरथ पूर्ण करनेको सर्वथा उद्यत थे
ākṛīḍamāno hṛṣṭātmā śrīmān vāyusuto yayau | priyāmanorathaṃ kartum udyataś cārulocanaḥ ||
โอรสแห่งวายุผู้รุ่งเรืองก้าวไปด้วยใจเบิกบาน ราวกับกำลังเล่นสนุก ภีมะผู้มีดวงตางดงามมุ่งมั่นพร้อมยิ่งที่จะทำให้ความปรารถนาของนางผู้เป็นที่รักสำเร็จ
वैशम्पायन उवाच