Somaka–Jantu Ākhyāna: Desire-Driven Sacrifice and Shared Karmic Consequence
धर्मराज उवाच यद्येवमीप्सितं राजन् भुड्क्ष्वास्य सहित: फलम् | तुल्यकालं सहानेन पश्चात् प्राप्स्यसि सदगतिम्,धर्मराज बोले--राजन्! यदि तुम्हारी ऐसी इच्छा है तो इनके साथ रहकर उतने ही समयतक तुम भी पापकर्मोंका फल भोगो, इसके बाद तुम्हें उत्तम गति प्राप्त होगी
ธรรมราชาตรัสว่า “ดูก่อนราชัน หากนี่คือความปรารถนาของเจ้า ก็จงอยู่ร่วมกับเขาและเสวยผลนั้นเถิด ตลอดกาลเวลาเท่าเทียมกันกับเขา แล้วภายหลังเจ้าจักได้บรรลุสุคติอันประเสริฐ”
धर्मराज उवाच