Udyoga Parva, Adhyaya 2 — Baladeva’s Counsel on Peace, Restitution, and Court Protocol
संरम्भमाणो विजित: प्रसहा तत्रापराध: शकुनेर्न कश्चित् । जब ये खेलने लगे और प्रतिपक्षीकी ओरसे फेंके हुए पासे जब बराबर इनके प्रतिकूल पड़ने लगे, तब ये और भी रोषावेशमें आकर खेलने लगे। इन्होंने हठपूर्वक खेल जारी रखा और अपनेको हराया, इसमें शकुनिका कोई अपराध नहीं है
เมื่อความเดือดดาลครอบงำ เขาดื้อดึงฝืนเล่นต่อไปจนพ่ายแพ้ด้วยตนเอง; ในเรื่องนี้ศกุนิมิได้มีความผิดอันใด
बलदेव उवाच