भीष्म–रामसंयुगनिवृत्तिः
Bhishma and Rama: Restraint and Withdrawal in the Engagement
यत्कृते दुःखवसतिमिमां प्राप्तास्मि शाश्वतीम् । पतिलोकाद् विहीना च नैव स्त्री न पुमानिह,“जिसके कारण मैं सदाके लिये इस दुःखमयी परिस्थितिमें पड़ गयी हूँ और पतिलोकसे वंचित होकर इस जगतमें न तो स्त्री रह गयी हूँ न पुरुष ही। उस गंगापुत्र भीष्मको युद्धमें मारे बिना तपस्यासे निवृत्त नहीं होऊँगी। तपोधनो! यही मेरे हृदयका संकल्प है, जिसे मैंने स्पष्ट बता दिया
yatkṛte duḥkhavasatim imāṃ prāptāsmi śāśvatīm | patilokād vihīnā ca naiva strī na pumān iha |
“เพราะเขา ข้าจึงตกสู่ที่พำนักแห่งความทุกข์อันยืนนานนี้ และเมื่อถูกตัดขาดจากโลกของสามี ในชาตินี้ข้าก็มิใช่หญิงแท้ มิใช่ชายแท้ จนกว่าข้าจะสังหารภีษมะ โอรสแห่งคงคา ในสนามรบ ข้าจะไม่เลิกตบะ โอ้ผู้มั่งคั่งด้วยตบะ! นี่คือปณิธานในดวงใจของข้า และข้าได้ประกาศอย่างชัดแจ้งแล้ว”
भीष्म उवाच