उद्योगपर्व — अध्याय १५१: कृष्णस्य कौरव-अवज्ञा-निर्णयः तथा पाण्डव-योगाज्ञा
Krishna on the Kauravas’ Rejection of Counsel; Pandava Readiness Ordered
निविष्टान् पाण्डवांस्तत्र ज्ञात्वा मित्राणि भारत । अभिससुर्यथादेशं सबला: सहवाहना:,भारत! पाण्डवोंने कुरुक्षेत्रमें जाकर अपनी सेनाका पड़ाव डाल दिया है, यह जानकर उनसे मित्रता रखनेवाले बहुत-से राजा अपनी सेना और सवारियोंके साथ उनके पास, जहाँ वे ठहरे थे, आये
โอ ภารตะ! ครั้นทราบว่าเหล่าปาณฑพได้ไปถึงทุ่งกุรุเกษตรและตั้งค่ายทัพแล้ว บรรดากษัตริย์ผู้เป็นมิตรจำนวนมากก็พากันมาถึงยังที่พวกเขาพักอยู่ พร้อมด้วยกองทัพและพาหนะศึกของตน
वैशम्पायन उवाच